शिवरात्रि पर जागरण बदल सकता है
भाग्य शिवशम्भू होंगे प्रसन्न
- हम ' Shivratri' की रात क्या करते हैं:
- इज़ीतोएब्सब्लॉस्पॉट.com
महाशिवरात्रि की रात को आध्यात्मिक उन्नति, भक्ति और संयम के लिये माना जाता है इस दिन हम भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिये रातभर जागकर उनकेमंत्रो का जाप
करते हैं |
- रात्रिजागरण: भक्तगण पूरी रात जागते है जो आध्यात्मिक जागरण का प्रतिक माना जाता है |
- मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय और अन्य शिवजी के मन्त्रों का जाप कर अपने मन को शुद्ध करते हैं|
- भजन और कीर्तन: मंदिर में और घर में लोग भोलेनाथ की स्तुति में भजन - कीर्तन करते हैं |
- शिवलिंग का अभिषेक : शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, शहद, गन्ने का रस, धतूरा, बेलपत्र,
- आक के पत्ते आदि चढ़ाते हैं
- निर्जला व्रत: कुछ भक्तगण पूरे दिन उपवास रखते हैं पानी भी नही पीते हैं जबकि कुछ फलाहार करते हैं |
- ध्यान और प्रार्थना: इस रात को आत्मिक शान्ति के लिए बहुत शुभ माना जाता है |

- ' महाशिवरात्रि ' को रात में पूजा क्यों करें?
- शिवरात्रि की विशेष पूजा रात में ही होती है Lord Shiv Parvati विवाह हुआ था,इस रात को महारात्रि भी कहते हैं |
- शिव पार्वती विवाह: यह रात बहुत शुभ मानी जाती हैँ ,क्योकि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था |
इज़ीतोएब्सब्लॉस्पॉट.
- रात्रि का आध्यात्मिक महत्व: जैसा कि हम जानते हैं क़ि रात का समय ध्यान और शांति के लिये
- अच्छा माना गया है , इस समय हम मन को एकाग्र कर भगवान शिव की भक्ति में लगा सकते हैं |
- अंधकार पर प्रकाश की विजय: हम शिवजी को अज्ञान और अंधकार को दूर करने वाला मानते हैं
- इसलिए हमको अपने जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए रात में पूजा करना चाहिए |
- चार प्रहर की पूजा: इस दिन चार प्रहर में पूजा होती है |
- हर प्रहर में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करते हैं |
- पहला प्रहर : धर्म की प्राप्ति
- दूसरा प्रहर :समृद्धि की प्राप्ति
- तीसरा प्रहर: इच्छाओ की पूर्ति
- चौथा प्रहर : मोक्ष की प्राप्ति
- यदि आप पूरी रात नही जाग सकते तो मध्यरात्रि तक जागकर पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है |
- क्योकि इसी समय शिवजी का धरती पर प्रकट्य हुआ था |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें