नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्राह्मचारणी को प्रसन्न करने के लिए क्या करें


माता का आशीर्वाद लेने के लिए क्या करें 


माता ब्रह्माचारिणी, माँ दुर्गा का दूसरा स्वरुप हैं, ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन इनकी पूजा करने से हमारे अंदर त्याग और संयम की भावना की उत्पत्ति होती है। उनको हमने हमेशा नंगे पैर चलते हुए और एक हाथ में माला व दूसरे में कमंडल लिए हुए देखा है। ब्रह्म का अर्थ है तप और चारिणी का तात्पर्य है अच्छे आचरण वाली।इस आर्टिकल में आज हम ये जानेंगे कि नवरात्रि के दूसरे दिन हमें क्या करें और क्या नही, आशा करती हूँ कि आपको यह आर्टिकल पसंद आए।

माँ ब्राह्मचारिणी को हम हमेशा श्वेत वस्त्र धारण किये हुए देखते हैं, सफ़ेद रंग सादगी का प्रतीक है। इस दिन सफ़ेद या पीले परिधान पहनना अच्छा मानते हैं।

माता ब्राह्मचारिणी देवी को तप की देवी के रूप में देखा जाता है, इसलिए इस दिन मन को शांत रखते हुए अपना ध्यान माता की उपासना में लगाये और मन में किसी के प्रति दुर्भावना नहीं रखें।

जैसा कि लोगों का मानना है कि माता को मीठा खाना बेहद प्रिय है, इसलिए इस दिन माँ को मिश्री और मखाने की खीर का भोग लगाने से माँ हमको लम्बी उम्र का वरदान देती हैं। इसके अतिरिक्त, माता के मन्त्रों का जाप करें।


क्या नही करें दूसरे दिन 

  • उपासना के समय यानि कि जब हम माता की पूजा कर रहें हों, तो चमड़े की बेल्ट, चमड़े का पर्स या जूते व चप्पल को नहीं पहनना चाहिए।
  • इस दिन किसी को बुरे शब्द नहीं बोले और ना ही घर में किसी से लड़ाई करने की कोशिश करें।
  •  ब्राह्मचारिणी माता का ध्यान कर पूजन करें पूजा ख़त्म होने के बाद लौंग और कपूर से आरती अवश्य करें।
  • इस दिन मांस, मदिरा, प्याज़ और लहसुन का सेवन वर्जित है। अगर हमें व्रत नहीं रख रहें हैं तो भी हमको तामसिक भोजन नहीं करना है।
  • नौ दिन आप को नाखून भी नहीं काटने हैं, ऐसा लोगों का मानना है।





टिप्पणियाँ