Mahavir Jayanti 2026
महावीर जयंती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है।जैन धर्म के लोग महावीर जयंती को बहुत उल्लास से मनाते हैं।2026 में ये जयंती 31 मार्च को मनायीं जाएगी।लोग इस दिन जगह जगह प्रभात फेरी, जुलूस और अनुष्ठान भी करते हैं।भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थकर थे,उन्हें जैन धर्म का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण तीर्थकर माना जाता है।
महावीर भगवान कौन थे?
कुछ लोगों के अनुसार, इनका जन्म तो एक साधारण मनुष्य कि भांति हुआ था परन्तु उन्होंने अपने जीवन को वह दिशा और ज्ञान दिया, जिससे वर्तमान समय में भी उनको एक महान हस्ती के रूप में याद किया जाता है।
उनका जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व में कुंडलपुर में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्दार्थ और माता का नाम त्रिशला था।बचपन में इन्हें वर्धमान के नाम से जानते थे। अगर इनका बचपन देखा जाए तो बहुत राजसी ठाठ बाट में बीता था क्योकि ये राजकुमार थे। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी कमियों पर विजय पाई जो कि किसी साधारण मनुष्य के लिए असंभव होता है, उन्होंने ऐसा मुकाम हासिल किया जिससे वो लोगों की नजर में भगवान बन गये।
तीस वर्ष की आयु में सन्यास लेने के अनेक कारण हैं :
सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव रखना, इसी वजह से उन्होंने अहिंसा और दया का मार्ग अपनाया।भगवान महावीर का लक्ष्य था कि वे आत्मा का सच्चा ज्ञान प्राप्त कर मोक्ष की प्राप्ति कर लें।राजसी जीवन व्यतीत करने के बाबजूद, उनको सांसारिक सुखों में कोई भी दिलचस्पी नहीं रह गयी थी, उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था।वो जीवन के दुखों को समझते थे, जब उन्होंने देखा कि जन्म, मृत्यु, रोग और शोक हमेशा इंसान के जीवन में बने रहते हैं, इसलिए वे इन सबसे मुक्ति का रास्ता खोजना चाहते थे।
ये अहिंसा,सत्य, अपरिग्रह और संयम के महान उपदेशक माने जाते हैं।उन्होंने अहिंसा पर चलने की प्रेरणा दी।बारह साल तक कठिन तपस्या करने के बाद ऋजुपालिका नदी के तट पर उन्होंने करीब एक साल के वृक्ष के नीचे बैठकर उनको 'केवलज्ञान' की प्राप्ति हुई, ऐसा माना जाता है। उनको 72 साल की उम्र में, कार्तिक कृष्ण अमावस्या को बिहार के पावापुरी में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया, जिसको जैन धर्म को मानने वाले दिवाली के रूप में मनाते हैं।महावीर स्वामी ने "जिओ और जीने दो" का मूलमंत्र दिया। इसके अतिरिक्त जाति व धर्म के भेदभाव को नकार कर उन्होंने लोगों को जीवन को सरल तरह से जीने कर रास्ता बताया।
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