​सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी का महासंयोग: शीघ्र विवाह और अखंड सौभाग्य के सिद्ध उपाय I जानें मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सावन शिवरात्रि के अचूक शिव-गौरी उपाय


सावन की शिवरात्रि पर शिव-पार्वती पूजन: चार प्रहर की पूजा विधि, मंत्र और पारण नियम


क्या आप जानते हैं, कि आज सावन के महीने की (शिवरात्रि),इसके अतिरिक्त सावन के महीने में मंगलवार को अगर माता मंगला गौरी की उपासना मन से करें तो भोलेनाथ और माता पार्वती मुँह माँगा वरदान देते हैं, ऐसा लोगों का मानना है। आपने अगर व्रत रखा है, तो बहुत अच्छा, लेकिन अगर किसी स्वास्थ्य सम्बंधित परेशानी के कारण
 या किसी अन्य परेशानी के कारण नहीं व्रत रखा तो भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके हम उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

आइये इस आर्टिकल के द्वारा हम जानें कि कौन से मन्त्रों का जप करने से हमें मनपसंद वर की प्राप्ति होगी।

आज सावन माह की शिवरात्रि और मंगलवार का यह दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग है!

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती (माँ मंगला गौरी) दोनों का एक साथ पूजन करने से अक्षय पुण्य, अखंड सौभाग्य और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

आज के दिन का विशेष महत्त्व

  शिव और शक्ति का मिलन: मंगलवार का दिन माँ मंगला गौरी (पार्वती) को समर्पित है और सावन शिवरात्रि भगवान शिव का अतिप्रिय दिन है। ऐसे में आज के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने और माँ गौरी का पूजन करने से दांपत्य जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं।

 मंगल दोष से मुक्ति: यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है या विवाह में बाधाएं आ रही हैं, तो आज का
 दिन इसके निवारण के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

आज की विशेष पूजन विधि

  प्रातः स्नान व अभिषेक:

  शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल, दूध, दही, शहद, शक्कर (पंचामृत) चढ़ाएं।

    इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, और शमी के पत्ते अर्पित करें।

  माँ मंगला गौरी का पूजन:

    माँ पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर और सुहाग की सामग्री (16 श्रृंगार) अर्पित करें।

    माँ को लाल फूल और घर का बना हलवा या खीर का भोग लगाएं।

  विशेष अर्पण (जोड़े में पूजा):

    शिव-पार्वती को एक साथ लाल और पीले पुष्प अर्पित करें।

    भगवान शिव को चंदन और माता पार्वती को कुमकुम/सिंदूर का तिलक लगाएं।

आज जप करने योग्य मंत्र

  भगवान शिव के लिए:

    "ॐ नमः शिवाय"

          या 

महामृत्युंजय मंत्र: "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
   
  माँ मंगला गौरी के लिए:

    "ॐ मंगलागौर्यै नमः"

    या 

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"
   

आज के विशेष उपाय

  सुहाग की रक्षा और सुखी जीवन के लिए: शाम के समय किसी मंदिर में या घर के मंदिर में 16 आटे के दीपक देसी घी से प्रज्वलित करें।

  मनोकामना पूर्ति के लिए: आज किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को सुहाग सामग्री या लाल वस्त्र दान करें।

आज सावन शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) और मंगलवार का विशेष योग है। आज पूजा और जलाभिषेक के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

1. आज के शुभ मुहूर्त

पूजन / जलाभिषेक का समय/समय सीमा

चतुर्दशी तिथि / 11 अगस्त को सुबह 04:54 बजे से 12 अगस्त को मध्यरात्रि 01:52 बजे तक 

दिन का जलाभिषेक मुहूर्त /पूरे दिन जलाभिषेक कर सकते हैं (प्रातःकाल से शाम तक) 

  प्रथम प्रहर पूजा (शाम) /07:04 PM से 09:45 PM 

 द्वितीय प्रहर पूजा /09:45 PM से 12:26 AM (12 अगस्त) 

 निशिता काल पूजा (सर्वाधिक शुभ) / रात 11:59 PM से मध्यरात्रि 12:43 AM 

 तृतीय प्रहर पूजा /12:26 AM से 03:07 AM (12 अगस्त) 

 चतुर्थ प्रहर पूजा / 03:07 AM से 05:49 AM (12 अगस्त) 

2. आज की विशेष पूजा सामग्री

  भगवान शिव के लिए: गंगाजल/शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही, शहद, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, 
 भस्म, सफेद चंदन और शमी के पत्ते।
  माता पार्वती के लिए: लाल चुनरी, सिंदूर, कुमकुम, 16 श्रृंगार सामग्री (चूड़ी, बिंदी, मेहंदी आदि) और लाल फूल।


3. संयुक्त पूजन विधि

  संकल्प: स्वच्छ वस्त्र पहनकर हाथ में जल और अक्षत लेकर शिव-पार्वती का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।

  जलाभिषेक व रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर पहले गंगाजल, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और पुनः शुद्ध जल से अभिषेक करें। अभिषेक के समय "ॐ नमः शिवाय" का निरंतर जाप करते रहें।

  गौरी-शंकर श्रृंगार:

    शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भस्म और चंदन लगाएं।

    माता पार्वती की प्रतिमा/तस्वीर पर लाल चुनरी चढ़ाएं, सिंदूर लगाएं और सुहाग सामग्री अर्पित करें।

  गठबंधन (विशेष उपाय): यदि संभव हो तो शिव और पार्वती को एक लाल कलावे या लाल चुनरी के माध्यम से आपस में जोड़कर (गठबंधन) पूजन करें। इससे वैवाहिक जीवन सुखी होता है और विवाह से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं।

  भोग: खीर, हलवा या पंचमेवा का भोग लगाएं।

  आरती व दीपदान: शाम के समय या निशिता काल में 16 दीये जलाकर आरती करें।

4. जाप करने योग्य सिद्ध मंत्र

  शिवजी का मंत्र:

   ॐ नमः शिवाय

   ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

  माँ मंगला गौरी का मंत्र:


   सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
 शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

आज सावन शिवरात्रि व्रत के पारण (व्रत खोलने) का शुभ समय और नियम इस प्रकार हैं:

1. पारण का शुभ समय (12 अगस्त 2026)

  पारण मुहूर्त: 12 अगस्त 2026, बुधवार को प्रातः 05:49 बजे के बाद।

  पारण की कुल अवधि: सुबह 05:49 बजे से दोपहर 01:52 बजे (चतुर्दशी तिथि की समाप्ति) के बीच।

 नियम: सावन शिवरात्रि का व्रत हमेशा चतुर्दशी तिथि के दौरान अगले दिन सूर्योदय के बाद ही खोला जाता है।
 
2. व्रत पारण की सही विधि

  प्रातः स्नान व पूजा: बुधवार सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  शिव-पार्वती की अंतिम पूजा:

  भगवान शिव और माँ मंगला गौरी को जल अर्पित करें।

  चढ़ाए गए भोग (फल या मिठाई) का अंश उन्हें अर्पित करें और धूप-दीप जलाकर आरती करें।
  
दान-दक्षिणा:

   पारण करने से पहले किसी ब्राह्मण, मंदिर या जरूरतमंद को अनाज, फल, वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा का दान करें।

  जल ग्रहण एवं पारण:

  सबसे पहले भगवान शिव के चरणों का चरणामृत या पूजा में चढ़ाया गया फल/गंगाजल ग्रहण करके व्रत खोलें।

3. पारण के समय ध्यान रखने योग्य नियम

  सात्विक भोजन करें: व्रत खोलने के बाद शुद्ध और सात्विक भोजन (जैसे बिना प्याज-लहसुन की सब्जी, रोटी, चावल या खीर) ही खाएं।

  तामसिक पदार्थों से बचें: आज और कल पूरे दिन मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज या भारी/ताले-भुने खाने से परहेज करें।

  संयम रखें: व्रत का पारण करते समय बहुत अधिक भोजन एक साथ न खाएं, हल्का और सुपाच्य आहार लें।

  रात की पूजा (विशेषकर निशिता काल पूजा) और कल के दान-पुण्य से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

1. आज रात की 'निशिता काल' पूजा का महत्त्व और विधि सावन शिवरात्रि की रात में निशिता काल (रात 11:59 PM से 12:43 AM) का समय शिव-पार्वती की साधना के लिए सबसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  दीपदान: इस समय घर के मंदिर में या शिव मंदिर में देसी घी के 16 दीपक (माँ मंगला गौरी के निमित्त) और 1 बड़ा दीपक (भगवान शिव के लिए) प्रज्वलित करें।

  अभिषेक: यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो शिवलिंग पर थोड़ा सा गंगाजल, कच्चा दूध और शहद चढ़ाएं।

  मंत्र जप: निशिता काल में मौन रहकर या शांत मन से "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ मंगलागौर्यै नमः" का कम से कम 108 बार जाप करें।

  मनोकामना अर्पण: 11 बेलपत्रों पर चंदन से "राम" लिखकर शिवजी को अर्पित करें और अपनी मनोकामना कहें।

2. कल (बुधवार) सुबह के दान-पुण्य के नियमव्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए पारण से ठीक पहले दान करना बहुत शुभ माना जाता है:

  सुहाग सामग्री का दान: मंगलवार और शिवरात्रि का संयोग होने के कारण, माता पार्वती पर चढ़ाई गई सुहाग सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, चुनरी आदि) में से कुछ हिस्सा किसी शादीशुदा महिला या ब्राह्मणी को दान करें।

  अन्न और वस्त्र दान: किसी जरूरतमंद को चावल, आटा, चीनी, सफेद मिठाई या कोई लाल/सफेद वस्त्र भेंट करें।

  गौ सेवा: पारण से पहले गाय को रोटी और गुड़ खिलाएं।

रात की चार प्रहर पूजा और अलग-अलग मनोकामनाओं के विशेष उपाय इस प्रकार हैं:

1. रात की चार प्रहर पूजा (समय और सामग्री)

शिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बाँटकर पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर प्रहर में शिवजी का अलग-अलग द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है:

  प्रथम प्रहर (शाम 07:04 PM से 09:45 PM):
  •   अभिषेक: शुद्ध दूध से।
  •   मंत्र: "ॐ ह्रीं ईशानाय नमः"   
  • महत्त्व: आरोग्य और शांति की प्राप्ति।
  द्वितीय प्रहर (रात 09:45 PM से 12:26 AM):
  •     अभिषेक: दही से।
  •     मंत्र: "ॐ ह्रीं अघोराय नमः"
  •     महत्त्व: धन, संपत्ति और समृद्धि।
  तृतीय प्रहर (रात 12:26 AM से 03:07 AM):
  •     अभिषेक: देसी घी से।
  •     मंत्र: "ॐ ह्रीं वामदेवाय नमः"
  •     महत्त्व: संकटों और शत्रुओं से मुक्ति।
  चतुर्थ प्रहर (तड़के 03:07 AM से 05:49 AM):
  •     अभिषेक: शहद (और गंगाजल) से।
  •     मंत्र: "ॐ ह्रीं सद्योजाताय नमः"
  •     महत्त्व: मनोकामना पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति।
2. विशेष मनोकामनाओं के उपाय (शिव-पार्वती की कृपा के लिए)

  अखंड सौभाग्य और सुखी गृहस्थ जीवन:

    माँ मंगला गौरी और शिवजी को लाल चुनरी और लाल धागे (कलावे) से एक साथ बांधें (गठबंधन करें)।

    इसके बाद "सर्वमंगल मांगल्ये..." मंत्र का जाप करते हुए माँ पार्वती को सिंदूर अर्पित करें।

  शीघ्र विवाह या मनचाहा जीवनसाथी:
  •     108 बेलपत्र लें और हर बेलपत्र पर चंदन से "राम" लिखें।
  •     इन्हें "ॐ नमः शिवाय" बोलते हुए शिवजी पर अर्पित करें।
  आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए:

    निशिता काल (रात 11:59 PM से 12:43 AM) में शिवलिंग पर कच्चे दूध में थोड़ा सा 
जल और शक्कर मिलाकर अभिषेक करें।

    इसके बाद शमी के पत्ते चढ़ाएं।

  रोग व मानसिक तनाव से मुक्ति:

    शिवजी पर जल अर्पित करते समय महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और जलाभिषेक के बाद शिवजी पर चढ़ाया हुआ थोड़ा सा जल (चरणामृत) घर के सदस्यों पर छिड़कें।

चारों प्रहर की पूजा आरती और मंत्रों के शुद्ध उच्चारण की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:

1. मंत्रों का शुद्ध उच्चारण और अर्थ

महामृत्युंजय मंत्र

 मंत्र:

 "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
 उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
 
  उच्चारण ध्यान दें: "त्र्यम्बकं" (त्र्यम्-बकम्), "पुष्टि-वर्धनम्", "उर्वारुकम-इव"।
 
 अर्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी जीवों का पोषण करते हैं। जैसे ककड़ी अपनी बेल के बंधन से मुक्त हो जाती है, वैसे ही हमें मृत्यु और संसार के बंधनों से मुक्ति मिले, अमरता से नहीं।

मंगला गौरी मंत्र

 मंत्र:

 "सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
 शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

  उच्चारण ध्यान दें:

 "सर्व-मंगल मांगल्ये", "शिवे सर्व-अर्थ साधिके", "शरण्ये त्र्यं-बके गौरि"।

  अर्थ: हे सब प्रकार का कल्याण करने वाली, कल्याणमयी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण
  देने योग्य, तीन नेत्रों वाली हे गौरी! नारायणी! आपको नमस्कार है।

2. चार प्रहर की आरती की विधि

प्रत्येक प्रहर के पूजन के अंत में या रात की मुख्य पूजा के बाद आरती की जाती है।

आरती करने का सही नियम:

  दीपक: गाय के शुद्ध घी के 16 दीपकों (माँ मंगला गौरी के निमित्त) या कपूर से आरती करें।

  आरती घुमाने का क्रम:
  •     भगवान के चरणों के सामने 4 बार।
  •     नाभि के सामने 2 बार।
  •     मुखारविंद (चेहरे) के सामने 1 बार।
  •     पूरे शरीर पर 7 बार गोल घुमाएं (कुल 14 बार)।
3. मुख्य आरती (शिवजी एवं माता पार्वती)

जय शिव ओंकारा (शिवजी की आरती)

 जय शिव ओंकारा, हर जय शिव ओंकारा।
 ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ जय शिव ओंकारा...
 एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
 हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ जय शिव ओंकारा...
 दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
 त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ जय शिव ओंकारा...
 अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
 त्रिपुरारी कंसारी करमाला धारी॥ जय शिव ओंकारा...
 श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे।
 सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ जय शिव ओंकारा...
 कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी।
 सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥ जय शिव ओंकारा...
 ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
 प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥ जय शिव ओंकारा...
 त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
 कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे॥ जय शिव ओंकारा...
 
माँ मंगला गौरी (पार्वती जी) की आरती

 जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।
 ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुण गावत दाता॥ जय मंगला गौरी...
 सिंह वाहिनी माता, तुम ही जगदात्री।
 अखंड सौभाग्य दायिनी, तुम ही सब धात्री॥ जय मंगला गौरी...
 जो जन तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि पावत।
 पाप ताप मिट जावत, सुख सम्पति आवत॥ जय मंगला गौरी...
 माता पार्वती तुम ही, शिव की अर्द्धांगिन।
 सब संकट हर लेनी, सबकी तुम संगिन॥ जय मंगला गौरी...
 16 श्रृंगार चढ़ावत, जो तुमको ध्यावे।
 अचल सुहाग पावत, मनवांछित फल पावे॥ जय मंगला गौरी...
 
आरती के बाद आरती की लौ पर हाथ सेकें, उसे अपनी आँखों और सिर पर लगाएं, और क्षमा याचना करते हुए कहें:

"हे शिव-पार्वती, पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल के लिए मुझे क्षमा करें और मेरी मनोकामना पूर्ण करें।"

आज सावन शिवरात्रि और मंगलवार (मंगला गौरी) का यह दुर्लभ और अत्यंत पवित्र योग शीघ्र विवाह और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यदि विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों या रिश्ता पक्का न हो पा रहा हो, तो आज के दिन और रात में ये विशेष उपाय ज़रूर करें:


1. गौरी-शंकर का विशेष 'गठबंधन' (सबसे मुख्य उपाय)

  विधि: आज शाम की पूजा या रात की निशिता काल पूजा (11:59 PM से 12:43 AM) के दौरान माता पार्वती को एक लाल चुनरी अर्पित करें और भगवान शिव को एक पीला वस्त्र (या लाल कलावा/धागा) अर्पित करें।

  इसके बाद लाल कलावे या धागे से माता पार्वती की चुनरी और शिवजी के वस्त्र को आपस में जोड़ते हुए एक गांठ (गठबंधन) बांध दें।

  प्रार्थना: गठबंधन बांधते समय मन में शीघ्र विवाह की मनोकामना करें और "ॐ गौरीशंकराय नमः" का 108 बार जाप करें।

2. 108 बेलपत्र पर चंदन का उपाय

  विधि: 108 अखंडित (बिना कटे-फटे) बेलपत्र लें।

  प्रत्येक बेलपत्र के चिकने भाग पर पीले चंदन या केसर से "राम" लिखें।

  शिवलिंग पर एक-एक बेलपत्र चढ़ाते जाएं और हर बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करें।

  अंतिम बेलपत्र चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने की प्रार्थना करें।

3. केसर और हल्दी का जलाभिषेक

  विधि: तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, पीला चंदन, थोड़ी सी हल्दी और केसर मिलाएं।

  इस जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हल्दी और केसर बृहस्पति ग्रह को मजबूत करते हैं, जो विवाह का मुख्य कारक माना जाता है।

  अभिषेक करते समय "ॐ नमः शिवाय" या "ॐ सम्पूर्णाया नमः" का जाप करें।

4. माँ मंगला गौरी को सुहाग सामग्री अर्पण

  विधि: आज मंगलवार का दिन माँ गौरी का दिन है। शाम के समय माँ पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री (लाल चुनरी, सिंदूर, लाल चूड़ियाँ, बिंदी, मेहंदी आदि) अर्पित करें।

  माँ के सामने "सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥" 

मंत्र का जाप करें।

  पूजन के बाद इसमें से कुछ सामग्री किसी सुहागिन महिला को भेंट कर दें।

5. मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष मंत्र जाप

आज रात को शांत स्थान पर बैठकर इस पौराणिक मंत्र का 108 बार (1 माला) जाप करें:

 "हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया।
 तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम॥"
 
(यह मंत्र शीघ्र विवाह और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।)


आज ध्यान रखने योग्य मुख्य नियम:

  पूजा करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें।

  पूजा के दौरान काले कपड़े पहनने से बचें; पीले, लाल या सफ़ेद वस्त्र धारण करें।

  आज रात की पूजा (निशिता काल) का फल सबसे शीघ्र मिलता है, इसलिए संभव हो तो रात में यह उपाय अवश्य करें।

मंत्र का सही जाप करने का तरीका और पूजा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें नीचे दी गई हैं:

1. मंत्र जाप की सही विधि (Step-by-Step)

  दिशा और आसन: पूजा के समय अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें। बैठने के लिए लाल या पीले रंग के ऊनी आसन/कुश के आसन का प्रयोग करें।

  जाप की माला: यदि आपके पास रुद्राक्ष या स्फटिक की माला है, तो उससे जाप करें। यदि माला उपलब्ध न हो, तो उंगलियों पर गिनकर भी 108 बार जाप कर सकते हैं।

  उच्चारण: मंत्र का उच्चारण मन ही मन (उपांशु जाप) या इतनी धीमी आवाज में करें कि केवल आपको ही सुनाई दे।

  संकल्प: जाप शुरू करने से पहले हाथ में थोड़ा जल लेकर कहें— "हे भगवान शिव और माँ गौरी! मैं शीघ्र एवं योग्य विवाह की प्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप कर रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें।" जल को जमीन पर छोड़ दें।

2. मंत्र का शुद्ध उच्चारण अभ्यास

शीघ्र विवाह के लिए मुख्य मंत्र:

 "हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया।
 तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम॥"

इसे इस प्रकार धीरे-धीरे और स्पष्ट बोलें:

  हे गौरि (हे गौ-रि)
  शंकरार्धांगि (शं-क-रार्-धां-गि)
  यथा त्वं शंकरप्रिया 
(य-था त्वं शं-कर-प्रि-या)
  तथा मां कुरु कल्याणि 
(त-था मां कु-रु कल्या-णि)
  कान्तकान्तां सुदुर्लभाम (कान्त-कान्तां सु-दुर्-ल-भाम)

3. पूजा समाप्त करने का विशेष नियम

  जाप समर्पण: 108 बार जाप पूरा होने के बाद दाएं हाथ की हथेली में थोड़ा जल लें और कहें, "हे शिव-पार्वती, इस जाप का फल आपके चरणों में समर्पित है।" फिर जल धरती पर छोड़ दें।

  आसन का आचमन: आसन से उठने से पहले धरती माता को स्पर्श करें और माथे से लगाएं।

  सिंदूर तिलक (कन्याओं के लिए): यदि यह उपाय किसी कन्या के शीघ्र विवाह के लिए किया जा रहा है, तो माँ मंगला गौरी पर चढ़ाया गया थोड़ा सा सिंदूर अपनी मांग या माथे पर जरूर लगाएंI

सावन के मंगलवार को रखे जाने वाले मंगला गौरी व्रत का विशेष धार्मिक महत्त्व है। यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन माँ मंगला गौरी (माता पार्वती) की कृपा पाने के लिए पूजन और उपाय इस प्रकार करें:

1. पूजन सामग्री

 मूर्ति/चित्र: माँ दुर्गा या माता पार्वती का चित्र या मूर्ति।

  श्रृंगार सामग्री (16 वस्तुएं): लाल चुनरी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, आलता, मेहंदी, काजल, शीशा, कंघी, पायल, बिछिया, महावर, लाल धागा (कलावा), वस्त्र, फूल-माला और इत्र।

  पूजा वस्तुएं: धूप, दीप (अखंड दीया), कपूर, रोली, अक्षत, सुपारी, लौंग, इलायची, और 16-16 की संख्या में विभिन्न वस्तुएं (जैसे 16 सुपाड़ी, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 मखाने, 16 आटे के दीपक आदि)।

2. पूजा विधि

  संकल्प व स्नान: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ (संभव हो तो लाल या पीले) वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें।

  चौकी की स्थापना:एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माँ मंगला गौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

  अखंड दीप प्रज्वलित करें: माता के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं।

  16 श्रृंगार अर्पित करें: माता पार्वती को सिंदूर, लाल चुनरी और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।

  नैवेद्य एवं भोग: माँ को हलवा, पूरी, मखाने या सूखे मेवे का भोग लगाएं।

 कथा एवं आरती: मंगला गौरी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कथा के बाद आटे के 16 दीपकों से माँ की आरती करें।

3. माँ को प्रसन्न करने के विशेष उपाय

  16 की संख्या का विशेष प्रयोग: पूजा में अर्पित की जाने वाली सभी वस्तुएं (जैसे फल, फूल, लड्डू, सूखे मेवे) 
16 की संख्या में चढ़ाएं।

  सुहाग सामग्री का दान: पूजन के बाद 16 श्रृंगार की वस्तुएं किसी शादीशुदा महिला या ब्राह्मणी को दान करें।

  लाल वस्त्र व फल दान: किसी गरीब या जरूरतमंद सुहागिन महिला को लाल वस्त्र और फल भेंट करें।

  मंगल दोष निवारण: यदि विवाह में बाधा या विलंब हो रहा है, तो इस दिन माँ मंगला गौरी के साथ भगवान शिव का भी अभिषेक करें और माँ को लाल गुलाल अर्पित करें।

4. सिद्ध मंत्र (पूजा के समय जप करें)

 "सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

          या

 "ॐ मंगलागौर्यै नमः"

इस मंत्र का कम से कम 108 बार  जप करे I

यहाँ मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा और उद्यापन विधि की पूरी जानकारी दी गई है:

मंगला गौरी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय में धर्मपाल नाम का एक सेठ था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह हमेशा दुखी रहता था। काफी पूजा-पाठ और धर्म-कर्म के बाद उसे एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम धरम रखा गया।

ज्योतिषियों ने बताया कि यह बालक अल्पायु है और 16 वर्ष की आयु में सर्पदंश (सांप के काटने) से इसकी मृत्यु हो जाएगी। सेठ ने अपने पुत्र का विवाह एक ऐसी कन्या से कराया, जिसकी माता सदैव पूरी निष्ठा से मंगला गौरी का व्रत रखा करती थी। माता पार्वती के इस व्रत के प्रभाव से उस कन्या को अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान प्राप्त था, जिससे उसकी संतान कभी विधवा या विधुर नहीं हो सकती थी।

जब विवाह के बाद धरम की आयु 16 वर्ष हुई, तो माता पार्वती की कृपा और उस कन्या के मंगला गौरी व्रत के प्रभाव से कालस्वरूप सर्प आया अवश्य, लेकिन कन्या के पति को नुकसान पहुँचाए बिना ही लौट गया। इस प्रकार मंगला गौरी व्रत के प्रभाव से सेठ के पुत्र को नया जीवन मिला। तभी से सुखी वैवाहिक जीवन और संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।

मंगला गौरी व्रत का उद्यापन

यदि आपने सावन के सभी मंगला गौरी व्रत रखे हैं (सामान्यतः 16 या 20 मंगला गौरी व्रत का संकल्प लिया जाता है), तो अंतिम मंगलवार को इसका उद्यापन करना शुभ माना जाता है।

उद्यापन की आवश्यक सामग्री

  16 सुहाग पिटारी (प्रत्येक में 16-16 श्रृंगार की सामग्री)
  हवन सामग्री, समिधा (लकड़ी), कपूर और देसी घी, कलश, नारियल, लाल कपड़ा 16 आटे के दीपक फल, फूल, मिठाई (16-16 की संख्या में)

उद्यापन विधि

  प्रातः स्नान व संकल्प: सावन के अंतिम मंगलवार को प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और उद्यापन का संकल्प लें।

  पूजा एवं मण्डप निर्माण: घर के पूजा स्थल पर मण्डप सजाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ मंगला गौरी की स्थापना करें।

  कलश स्थापना: गणेश जी का ध्यान करते हुए कलश स्थापित करें और सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें।

  हवन:
 
 हवन कुंड तैयार करके उसमें 'ॐ मंगलागौर्यै नमः' या 'सर्वमंगल मांगल्ये...' मंत्र का उच्चारण करते हुए 108 आहुतियां दें।

    हवन के बाद आटे के 16 दीपकों को घी से भरकर प्रज्वलित करें और माँ की आरती करें।

  सुहागिनों का पूजन व दान:

    16 सुहागिन महिलाओं (या ब्राह्मणी) को आमंत्रित करें।

    उन्हें रोली-कुमकुम का तिलक लगाएं, 16 श्रृंगार की सुहाग पिटारी और वस्त्र भेंट करें।

  भोजन एवं आशीर्वाद:
  •     आमंत्रित सुहागिनों को हलवा, पूरी और सात्विक भोजन कराएं।
  •     उनके चरण स्पर्श करके अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लें।
  •     अंत में स्वयं पारण करके व्रत पूर्ण करें।





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